श्री मोक्षगुंडम विश्वैश्वरैया का जीवन परिचय

Slogan Hindi MVishभारत में हम प्रतिवर्ष 15 सितम्बर को “अभियंता दिवस” मनाते हैं जो प्रसिद्ध अभियंता और प्रशासक, भारतरत्न श्री मोक्षगुंडम विश्वैश्वरैया का जन्म दिन है । यह प्रथा इंस्टिट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स (भारत) ने इनके उत्कृष्ट कार्यों के स्मरण के उद्देश्य से वर्ष 1968 से प्रारंभ की और इस प्रकार 2016 में मनाया जाने वाला यह 49 वाँ “अभियंता दिवस” है । पूरा लेख आगे पढ़िये। Continue reading

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राजस्थान के बाँध और उनकी सुरक्षा व्यवस्था – एक सिंहावलोकन

राजस्थान में सदियों से बाँध बना कर जल संचय की परम्परा रही है । आज़ादी से पहले राजस्थान बाँध निर्माण में अग्रणी था पर आज़ादी के बाद लगातार पिछड़ता जा रहा है । इसी के साथ पुराने बाँधों की सुरक्षा व्यवस्था भी अपेक्षित स्तर की नहीं है और सदियों पुराने बाँधों की पाल पर विकास, सौंदर्यीकरण आदि के नाम पर अनियोजित निर्माण कार्य हो रहे हैं जो इनकी सुरक्षा का ख़तरा बढ़ा सकते हैं । इस बारे में पूरा लेख आगे पढ़िये ।

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अभियंताओं का सामाजिक दायित्व

“अभियंता दिवस” पर विशेष आलेख

m vishveshvraiyaभारत में हर वर्ष 15 सितंबर को “अभियंता दिवस” मनाया जाता है। प्रतिभा के धनी प्रसिद्ध अभियंता भारत रत्न डॉ. श्री मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म इस दिन हुआ था और उनके उत्कृष्ट कार्यों के स्मरण के उद्देश्य से यह परंपरा वर्ष 1968 से इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स द्वारा प्रारंभ की गई और इस प्रकार 2016 में मनाया जाने वाला यह 49 वाँ “अभियंता दिवस” है। पूरा लेख आगे पढ़िये।

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मनरेगा कार्यों के लिये सामग्री व्यवस्थापन नीति में बदलाव की आवश्यकता

केवल राजस्थान में ही मनरेगा योजना के लिये 3.4 करोड़ सीमेंट के कट्टे और 8 करोड़ किलो स्टील सरिया प्रतिवर्ष खरीदा जाना अनुमानित है जिसे पंचायतवार बिलौचियों के माध्यम से न खरीद कर राज्य स्तर पर सीधा निर्माताओं से खरीदा जावे तो कुल मात्रा के कारण होने वाली प्रतिस्पर्धा, और बिलौचियों के हटने से दरें लगभग 10 प्रतिशत कम हो सकती हैं और लगभग 120 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष बचाये जा सकते हैं । पूरा लेख आगे पढ़िये .. .. Continue reading

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उदयपुर का जल प्रबंधन – अतीत और आज

IMG_0530_thumb.jpgउदयपुर और उदयपुर के आसपास की झीलें तो अपने पुरखों के उत्कृष्ट “जल प्रबंधन” की जीती जागती तस्वीरें हैं ही, इस शहर के स्थल चयन से ले कर शहरकोट के अंदर के भू उपयोग में हरियाली के प्रावधान, तत्कालीन भवनों के नक्शे और इनकी निर्माण शैली, जल उपयोग और जल निकास व्यवस्था आदि सभी में भी गंभीर जल प्रबंधन की झलक है । जब विश्व के अन्य देशों में “जल प्रबंधन” तो क्या बाँध निर्माण की तकनीक भी आरंभिक अवस्था में थी, उदयपुर के तत्कालीन शासक राजसमंद और जयसमंद जैसी विशाल झीलें बना चुके थे । पूरा लेख आगे पढ़िये

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आहार बदलें – पानी बचाएं

 

thumb.jpgदिनचर्या की तुलना में आहार में बदलाव कर हम कहीं अधिक पानी बचा सकते हैं । जहाँ एक किलो गेहूँ के उत्पादन के लिये औसतन 1000 लिटर पानी की आवश्यकता होती है वहीं एक किलो जौ के लिये 700 लिटर, एक किलो चने के लिये 600 लिटर और एक किलो मक्का या बाजरे के लिये 300 लिटर पानी ही चाहिये जब कि एक किलो चाँवल के लिये 3500 लिटर पानी चाहिये। इन सबकी तुलना में आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि एक किलो माँस के लिये 15,500 लिटर पानी की आवश्यकता होती है। पानी की ऐसी बचत के एक उदाहरण के तौर पर यदि एक लाख लोग खालिस गेहूँ के बजाय गेहूँ, जौ और चने का मिश्रित अन्न (औसत 75 – 20 -5 अनुपात में) खाएं तो इस लेख में दिये विवरण के अनुसार एक साल में 48 करोड़ लिटर पानी बचाया जा सकता है । पूरा लेख आगे पढ़िये ।

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वाइ-फ़ाइ रूटरों (Wi-Fi routers) से स्वास्थ्य पर कुप्रभाव

Wi-Fi Routerनव विकसित वाइ-फ़ाइ तकनीक, जिससे बिना किन्हीं तारों के कम्प्यूटरों, सैल-फ़ोनों आदि को इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है और दूरस्थ प्रिंटर से प्रिंट लिये जा सकते हैं, का लोक प्रिय होना और दिनों दिन उपयोग बढ़ना स्वाभाविक ही है। लेकिन चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस तकनीक में काम लिये जाने वाले रूटर से उत्पन्न रेडिएशन अपने स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है। यह निष्कर्ष 34 वैज्ञानिक अध्ययनों से सामने आया है जिसकी सूचि इंग्लैंड स्थित "स्टोप स्मार्ट मीटर्स" (Stop Smart Meters) नामक वैब साइट पर प्रकाशित हुई है। इन अध्ययनों में यह पाया गया है कि सरदर्द, शुक्राणुसंख्या घटाव, तनाव आदि का एक कारण वाइ-फ़ाइ तकनीक का रेडिएशन है।

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NEED TO CHECK POLLUTION BEFORE RECHARGING GROUND WATER

water pollutionThe most suitable solution for current water crisis is to adopt techniques of Rain Water Harvesting (RWH) & Ground Water Recharge (GWR), as both these are low cost and complementary solution to the rising water crisis. However, before adopting this, it is very necessary to ascertain that whatever recharge is injected in to the ground is free of all hazardous contamination. Polluted water if once percolates to ground, it deteriorates the entire safe quality water and it requires heavy expenses as well as centuries time to get rid of such induced contamination. The techniques of ground water recharge are to be tackled with at most care so as not to permit any polluted water to percolate to aquifer. Read full article below.

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संपन्नता और हमारी आदतें

Inage Prosperityअमेरिका के दो समृद्धि गुरुओं, टॉम कॉरले तथा दवे राम्से, ने पाँच साल तक अमीरों और गरीबों की आदतों का अध्ययन कर कुछ रोचक निष्कर्ष निकाले हैं जिनसे यह विदित होता है कि मुख्यतः हमारी आदतें हमें संपन्नता या गरीबी की ओर ले जाती हैं। यह सिर्फ़ कोरी कल्पना है कि संपन्न लोग विरासत से धन पाते हैं और इस कारण धनी हैं। भारत में तो इतने अध्ययन नहीं होते लेकिन अमेरिका में हुए अध्ययनों के अनुसार वहाँ केवल 5% लोग ही अपनी विरासत के कारण धनी हैं। यदि आप भी संपन्नता के इच्छुक हैं तो अपनी मान्यताओं व सोच में परिवर्तन करने के प्रयास करें और केवल भाग्य को न कोसें। रामचरित मानस के सुंदरकांड (चौपाई – 2, छंद – 50 के बाद) में लक्ष्मण जी ने कहा है कि – “देव देव आलसी पुकारा” और इसलिये संपन्न बनने के लिये आलस्य त्याग भी आवश्यक है। अमीरों और गरीबों की आदतों में अंतर की जानकारी आगे पढ़िये।

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“विश्व शौचालय दिवस – 19 नवम्बर” – भारत में उपेक्षित क्यों ?

toiletless population statusसंयुक्त राष्ट्र संघ ने अच्छे स्वास्थ्य के लिये शौचालय की महत्ता की ओर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 19 नवम्बर को “विश्व  शौचालय  दिवस” मनाने का एक प्रस्ताव पारित किया है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों के करीब 2.5 अरब (36%) लोग खुले में शौच के लिये मजबूर हैं जबकि विश्व की जनसंख्या करीब 7 अरब है। खेद की बात यह है कि ऐसे खुले में शौच के लिये मजबूर लोगों में से 63.80 करोड़ (देश की कुल जनसंख्या के 53%) लोग भारतीय हैं। स्वाधीनता के 66 वर्ष बाद भी भारत की यह स्थिति शोचनीय है क्योंकि हमारा देश इस मामले में इंडोनेशिया जैसे देश से भी  पिछड़ा  हुआ है जहाँ शौचालय रहित लोगों की संख्या 5.80 करोड़ है जो वहाँ की कुल जनसंख्या (24.7 करोड़) का 23% ही है। चीन में तो शौचालय सुविधा रहित लोगों की जनसंख्या केवल 4% ही है। ऐसी विचारणीय स्थिति होते हुए भी समाचार पत्रों से कहीं भी यह नहीं झलकता कि देश में हमने “विश्व  शौचालय  दिवस” मना कर इस बारे में चेतना जागृत करने का प्रयास किया हो। ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे की उपेक्षा राष्ट्रहित के विरुद्ध है।

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